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चुना गया प्रश्न और प्रकाशित पाठ Google को भेजे जाते हैं। वह इन्हें अपनी सेवाओं के सुधार में उपयोग कर सकता है। हर उत्तर आपके 24 घंटे के 5 निःशुल्क AI संदेशों में से एक उपयोग करता है।
केवल सामान्य जानकारी। AI से त्रुटि हो सकती है।
पहचान संख्या और टोकन वर्ष पक्का करें
अधिवक्ता का AUIN और संबंधित दाखिले में दर्ज Year of Token की पुष्टि करें। मिलान के लिए केस प्रकार और पक्षकारों के नाम रखें। फ़ॉर्म टोकन का वर्ष माँगता है; अपने आप वर्तमान वर्ष या नामांकन वर्ष न भरें।
AUIN से खोज करें
AUIN से केस खोज खोलें चुनें। प्रकार पता हो तो Nature of Case चुनें; सूची में “- ALL -” भी है। AUIN और Year of Token अपने-अपने खानों में भरें। चित्र का कोड पूरा करें और Show चुनें।
ज़रूरी केस की पहचान करें
मिले केस संदर्भ को पक्षकारों और अपने दस्तावेज़ से मिलाएँ। हर संभावित मेल का पूरा प्रकार, संख्या और वर्ष लिखें। पहचाने गए केस को देखने के लिए अलग केस की स्थिति खोलें चुनें; केवल अधिवक्ता की पहचान संख्या पर निर्भर न रहें।
अलग केस की स्थिति खोलेंसुनवाई सूची के लिए सही सेवा खोलें
यदि जानना है कि सुनवाई के लिए कौन-से मामले सूचीबद्ध हैं, तो सुनवाई सूची की खोजें खोलें चुनें। निर्देशिका में AUIN Wise Search और Advocate Name Wise Search हैं। केवल केस स्थिति का नतीजा सुनवाई की पक्की योजना नहीं देता।
सुनवाई सूची की खोजें खोलेंनतीजा खाली या अप्रत्याशित हो तो
मान बदलने से पहले अधिवक्ता या दाखिले के रिकॉर्ड से AUIN, टोकन वर्ष और चुने प्रकार की फिर पुष्टि करें। आज़माई गई जानकारी लिखकर रखें। अलग केस संख्या पता हो तो किसी और की पहचान संख्या का अनुमान लगाने के बजाय उसी से खोज करें।
आधिकारिक स्रोत
स्रोत जाँचे गए
पटना हाई कोर्ट · अधिवक्ता की AUIN से केस खोजपटना हाई कोर्ट · केस संख्या से खोजपटना हाई कोर्ट · वाद सूची की सेवाएँसेवा का मार्गदर्शन, आपके मामले की विधिक सलाह नहीं। वर्तमान निर्देशों के लिए दिए गए आधिकारिक स्रोत देखें।