पुनर्वास प्रदान किए बिना दुकानदारों को बेदखल करना अत्यधिक निंदनीय: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुनर्वास या मुआवजे के बिना अस्पताल परियोजना के लिए अयोध्या में दुकानदारों को बेदखल किए जाने को अत्यधिक निंदनीय करार दिया।
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हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुनर्वास या मुआवजा दिए बिना 300 बिस्तरों वाले सुपर-स्पेशलिटी अस्पताल के निर्माण के लिए अयोध्या में दुकानदारों को बेदखल करने को अत्यधिक निंदनीय बताया है।
अदालत ने अवलोकन किया कि पट्टा समाप्त किए बिना दुकानदारों को परिसर खाली करने के लिए कहना संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के तहत उनके आजीविका के अधिकार को प्रभावित करता है।
पीठ ने राज्य के चिकित्सा और स्वास्थ्य विभाग को तीन सप्ताह के भीतर एक हलफनामा दाखिल कर प्रस्तावित पुनर्वास या मुआवजे के कदमों की जानकारी देने का निर्देश दिया।
यह आदेश मोहम्मद नईम और पांच अन्य द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया गया, जिन्हें 2000 में सीतापुर नेत्र अस्पताल सोसाइटी द्वारा 30 साल के पट्टे पर दुकानें दी गई थीं।
कथित अवैध हिरासत पर अदालत की आपत्ति के बाद दो पुलिस अधिकारी निलंबित
छह दिन की कथित हिरासत पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की आपत्ति के बाद देवरिया में दो पुलिस अधिकारी निलंबित हुए।
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हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, कथित अवैध हिरासत पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की आपत्ति के बाद देवरिया पुलिस ने सलेमपुर के थाना प्रभारी और जांच उप-निरीक्षक को निलंबित किया।
व्यक्ति की माँ ने आरोप लगाया था कि उनके बेटे को छह दिन तक थाने में रखा गया।
रिपोर्ट के अनुसार, जांच में सीसीटीवी फुटेज देखी गई, जिसमें वह व्यक्ति थाने के अंदर दिखाई दिया।
अदालत ने जांच अधिकारी को सीसीटीवी फुटेज और संबंधित रिकॉर्ड के साथ 23 अक्टूबर को पेश होने का निर्देश दिया।
सुधार: हिरासत को आरोप के रूप में स्पष्ट किया गया। सामान्य कानूनी कथन की जगह रिपोर्ट में दिया गया अदालत का निर्देश जोड़ा गया।
मुरुड बीच पर डूबने के मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने आपराधिक कार्यवाही रद्द की
अदालत को ऐसा सबूत नहीं मिला जो कॉलेज कर्मचारियों की लापरवाही को मुरुड बीच पर छात्रों की मौत से जोड़ता हो।
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हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुरुड बीच पर छात्रों के डूबने के मामले में पुणे के एक कॉलेज से जुड़े 17 लोगों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द की।
मामला 2016 में कॉलेज के भ्रमण के दौरान तीसरे वर्ष के 14 छात्रों की मौत से जुड़ा था।
अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसी लापरवाही का सबूत नहीं था जिससे छात्रों के डूबने के लिए कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराया जा सके।
अदालत ने घटना को कर्मचारियों के सीधे नियंत्रण से बाहर और पहले से अनुमान न लगाई जा सकने वाली घटना माना। फैसला इस मामले के साक्ष्यों पर आधारित था।
सुधार: अनुपालन रिपोर्ट का असमर्थित संदर्भ हटाकर इस मामले के साक्ष्यों और फैसले का विवरण दिया गया।
महाराष्ट्र ने संयुक्त जमीन की बिक्री के लिए सह-मालिकों की सहमति के नियम बदले
महाराष्ट्र में संयुक्त जमीन की बिक्री के लिए सह-मालिकों की सहमति चाहिए; विक्रेता के हिस्से का आधिकारिक माप नक्शा होने पर छूट है।
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हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, महाराष्ट्र ने संयुक्त नामों पर दर्ज जमीन की बिक्री के पंजीकरण की शर्तें बदली हैं।
साझा प्रॉपर्टी कार्ड या 7/12 उतारे में दर्ज जमीन के लिए सामान्यतः सह-मालिकों की लिखित सहमति या अनापत्ति प्रमाण पत्र चाहिए।
लेकिन भूमि अभिलेख विभाग का माप नक्शा विक्रेता का हिस्सा दिखाता हो, तो अन्य सह-मालिकों की सहमति के बिना पंजीकरण हो सकता है।
राजस्व विभाग ने 19 अक्टूबर को परिपत्र जारी किया। रिपोर्ट के अनुसार, इसका उद्देश्य सह-मालिकों की जानकारी के बिना हुई बिक्री से पैदा होने वाले विवाद कम करना है।
सुधार: माप नक्शा देने पर लागू महत्वपूर्ण छूट जोड़ी गई और सह-मालिकों की हिंदी वर्तनी सुधारी गई।